FIR किसी और के नाम, लेकिन पुलिस ने उठा लिया पत्रकार!

पत्रकारों का थाना घेराव, सड़क पर बवाल, सरकार पर बढ़ा दबाव! 

क्या यह गलती थी या किसी बड़ी साजिश का हिस्सा?

भोपाल की कटारा हिल्स पुलिस ने एक एक्सीडेंट केस में आरोपी कुलदीप सिसोदिया की जगह पत्रकार कुलदीप सिंगोरिया को उठा लिया। यह खबर पूरे पत्रकारिता जगत में आग की तरह फैली और भोपाल में हड़कंप मच गया।

थाने के बाहर जबरदस्त हंगामा, पत्रकारों का धरना-प्रदर्शन, पुलिस की खुली पोल – अब जवाब कौन देगा?

क्या है पूरा मामला?

टीला जमालपुर थाने में 20 मार्च को फरियादी शेख अकील ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि सफेद बोलेरो गाड़ी ने उसकी स्कूटी को टक्कर मारी, फिर उसमें बैठे लोगों ने धमकाया, मारपीट की और 50 हजार रुपये मांगे।

  • FIR में कुलदीप सिसोदिया का नाम था, लेकिन पुलिस ने पत्रकार कुलदीप सिंगोरिया को उठा लिया।
  • कोई सबूत नहीं, कोई जांच नहीं – सीधे गिरफ्तारी!
  • पत्रकार सिंगोरिया के पास न वह गाड़ी थी, न ही वह घटनास्थल पर मौजूद थे!

अब सवाल उठता है – क्या यह पुलिस की लापरवाही है या किसी बड़े खेल का हिस्सा?

भोपाल में उबाल, पत्रकारों ने मोर्चा खोला!

जैसे ही कुलदीप सिंगोरिया की गिरफ्तारी की खबर फैली, भोपाल के पत्रकारों ने पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

  • थाने के बाहर उग्र प्रदर्शन
  • पीएचक्यू के बाहर चक्काजाम
  • पुलिस के खिलाफ नारेबाजी, सरकार से जवाब मांगने की मांग

आंदोलन इतना उग्र हो गया कि भाजपा के बड़े नेता भी मौके पर पहुंचे और पुलिस से जवाब मांगा। पत्रकारों की भीड़ बढ़ती गई, और पुलिस प्रशासन दबाव में आ गया।

कमलनाथ ने सरकार को ललकारा – "यह पत्रकारों की आवाज दबाने की साजिश!"

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (Twitter) पर पत्रकारों के विरोध प्रदर्शन का वीडियो पोस्ट करते हुए सरकार को घेरा।

"भोपाल में पत्रकारों को झूठे केस में फंसाकर गिरफ्तार किया जा रहा है! यह लोकतंत्र पर हमला है! सरकार तुरंत निष्पक्ष जांच करे और पत्रकार को रिहा करे!"

कमलनाथ के बयान के बाद पूरे मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया।

पुलिस के कॉल पर गया था कुलदीप, फिर सीधा हवालात!

कुलदीप सिंगोरिया सिक्योरिटी एजेंसी खोलने की तैयारी में थे और इसके लिए उन्हें थाने से वेरिफिकेशन कराना था।

  • सोमवार शाम 7 बजे पुलिस का कॉल आया – "थाने आ जाइए!"
  • कुलदीप को लगा कि यह वेरिफिकेशन के लिए बुलाया गया है।
  • रात 10 बजे तक नहीं लौटे, फोन भी बंद हो गया!
  • परिवार और दोस्तों ने खोजबीन की, तो पता चला कि पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
  • "गिरफ्तारी नहीं, यह प्लानिंग थी!" – पत्रकारों का आरोप

भोपाल के पत्रकारों का मानना है कि यह सिर्फ गलती नहीं, बल्कि सोची-समझी साजिश है।

  • पुलिस को पता था कि जिस कुलदीप पर केस है, वह कोई और है!
  • फिर भी पत्रकार कुलदीप सिंगोरिया को फंसाया गया!
  • किसी बड़े आदमी को बचाने के लिए क्या यह चाल चली गई?

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है –
आखिर निर्दोष पत्रकार को फंसाने के पीछे कौन है?
किसका नाम बचाने के लिए यह गिरफ्तारी की गई?
क्या पुलिस किसी के दबाव में काम कर रही थी?

थाना प्रभारी सस्पेंड, लेकिन पत्रकारों की मांग – "गिरफ्तारी रद्द हो!"

जैसे-जैसे मामला बढ़ता गया, DCP जोन-2 संजय अग्रवाल ने थाना प्रभारी गोपाल शुक्ला को लाइन अटैच कर दिया।


लेकिन पत्रकारों ने इस कार्रवाई को नाकाफी बताते हुए अल्टीमेटम दे दिया –

"अगर कुलदीप सिंगोरिया को रिहा नहीं किया गया, तो यह आंदोलन और बड़ा होगा!"

सरकार के लिए सिरदर्द बना यह मामला – अब क्या होगा आगे?

भोपाल में पत्रकारों का गुस्सा बढ़ता ही जा रहा है। अगर सरकार ने जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो यह आंदोलन और बड़ा हो सकता है।

अब देखना यह है कि –

  • क्या पुलिस अपनी गलती सुधारेगी?
  • क्या निर्दोष पत्रकार को जल्द रिहाई मिलेगी?
  • या फिर यह मामला और भी बड़ा राजनीतिक विवाद बनेगा?

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