नई दिल्ली/यांगून: दक्षिण-पूर्व एशियाई देश म्यांमार में शुक्रवार देर रात आए 7.7 तीव्रता के भीषण भूकंप ने भारी तबाही मचाई। अब तक 1,644 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 3,400 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। राहत और बचाव कार्य जारी है, लेकिन मलबे में अभी भी सैकड़ों लोगों के दबे होने की आशंका है।

भूकंप का केंद्र और झटकों की तीव्रता

अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के अनुसार, भूकंप का केंद्र म्यांमार के मंडलाय क्षेत्र में था और यह लगभग 80 किलोमीटर की गहराई में आया। इस भूकंप के झटके थाईलैंड, बांग्लादेश और भारत के पूर्वोत्तर राज्यों तक महसूस किए गए। भूकंप के कुछ घंटे बाद शनिवार दोपहर 3:30 बजे 5.1 तीव्रता का एक और झटका आया, जिससे इलाके में दहशत का माहौल बन गया। लोग अब भी डर के कारण घरों के अंदर जाने से बच रहे हैं।

सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र

भूकंप से सबसे ज्यादा तबाही म्यांमार के सागाइंग, मंडलाय, और म्यित्चीना क्षेत्रों में हुई है। सागाइंग में 350 से ज्यादा मकान पूरी तरह तबाह हो गए।मंडलाय में एक स्कूल और कई सरकारी इमारतें गिर गईं म्यित्चीना में रेलवे स्टेशन और कई पुलों को नुकसान हुआ है। थाईलैंड में 30 मंजिला इमारत गिरी, कई मजदूर फंसे म्यांमार से सटे थाईलैंड के बैंकॉक में एक निर्माणाधीन 30 मंजिला इमारत पूरी तरह गिर गई। इस इमारत में काम कर रहे 50 से अधिक मजदूरों के मलबे में दबे होने की खबर है।

थाईलैंड के प्रधानमंत्री सेता थावीसिन ने आपातकाल की घोषणा कर दी है और सेना को राहत कार्य में लगा दिया गया है।

भारत पर असर और सरकार की प्रतिक्रिया

भारत में भी इस भूकंप के झटके कोलकाता, इंफाल, मणिपुर, और मेघालय में महसूस किए गए, हालांकि कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने म्यांमार के सैन्य नेता जनरल मिन आंग ह्लाइंग से बात कर हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया है। भारत ने "ऑपरेशन ब्रह्मा" के तहत 15 टन राहत सामग्री और 80 बचावकर्मियों की एक टीम म्यांमार भेजी है।

म्यांमार में आपातकाल घोषित, अंतरराष्ट्रीय मदद की अपील म्यांमार की सैन्य सरकार ने छह राज्यों में आपातकाल लागू कर दिया है और संयुक्त राष्ट्र सहित कई देशों से मदद की अपील की है।

संयुक्त राष्ट्र (UN) ने 5 मिलियन डॉलर की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।

चीन ने राहत सामग्री और मेडिकल टीम भेजने की बात कही है।

अमेरिका और यूरोपियन यूनियन भी सहायता के लिए तैयार हैं।

बचाव कार्य और भविष्य की चुनौतियां राहत और बचाव कार्य तेजी से चल रहा है, लेकिन भारी बारिश और टूटी हुई सड़कों के कारण बचाव दल को मुश्किलें आ रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, भूकंप का प्रभाव लंबे समय तक रहेगा और अगले कुछ दिनों तक और झटके आने की संभावना है।

भूकंप से बचाव के लिए क्या करें?

विशेषज्ञों के मुताबिक, भूकंप के दौरान खुले स्थान पर जाएं, भारी वस्तुओं से दूर रहें, और बिजली के उपकरणों से बचें।

निष्कर्ष

यह भूकंप म्यांमार के लिए एक भयानक त्रासदी साबित हुआ है। दुनिया भर के देश अब म्यांमार की मदद के लिए आगे आ रहे हैं, लेकिन अब भी सैकड़ों लोग मलबे में दबे हुए हैं और उनके बचाव के लिए समय के साथ संघर्ष जारी है। यह ख़बर हमें सूत्रों व सोशल मीडिया द्वारा मिली है 

यह रिपोर्ट 'पुरक' चैनल के लिए तैयार की गई है। Stay tuned for updates!